शनिवार, 4 जून 2011

ऐ इश्क हमें इतना तू बता, अंजाम हमारा क्या होगा... मुन्नी बेगम

ऐ इश्क हमें
ऐ इश्क हमें इतना तू बता, अंजाम हमारा क्या होगा
तकदीर बता अब इससे बुरा, अंजाम हमारा क्या होगा
ऐ इश्क हमें ...

नादान चमन में कलियों ने, लब खोले नहीं हंसने के लिए
वो पूछ रही है शबनम से, अंजाम हमारा क्या होगा
ऐ इश्क हमें ...

कश्ती न रही, साहिल न रहा, साहिल की तमन्ना भी न रही
ऐ पूछने वाले ज़ाहिर है, अंजाम हमारा क्या होगा
ऐ इश्क हमें इतना तू बता, अंजाम हमारा क्या होगा

गुरुवार, 2 जून 2011

अहले देर-ओ-हरम रह गए... मुन्नी बेगम

अहले देर--हरम रह गए
अहले देर-ओ-हरम रह गए
तेरे दीवाने कम रह गए

उनकी हर शै संवारी मगर
फिर भी जुल्फों में ख़म रह गए

देखकर उनकी तस्वीर को
आईना बनके हम रह गए

बेतकल्लुफ़ वो ग़ैरों से हैं
नाज़ उठाने को हम रह गए

हमसे पी कर उठा न गया
लड़खड़ा के क़दम रह गए

मिट गए मंजिलों के निशां
सिर्फ़ नक्श-ए-क़दम रह गए

पास मंज़िल के मौत आ गयी
जब सिर्फ़ दो क़दम रह गए

अहले देर-ओ-हरम रह गए
तेरे दीवाने कम रह गए

गुरुवार, 5 मई 2011

आसमां से उतारा गया , जिंदगी दे के मारा गया...मुन्नी बेगम

आसमां से उतारा गया
आसमां से उतारा गया , जिंदगी दे के मारा गया
इश्क़ जिसने किया सोच ले, वो तो बेमौत मारा गया

मेरी महफ़िल से वो क्या गए, साथ में दिल हमारा गया
मुझको साहिल का दे के फरेब, मौत के घाट उतारा गया

मौत से भी जो ना मर सका, उसको नज़रों से मारा गया
आसमां से उतारा गया, जिंदगी दे के मारा गया

गायिका: मुन्नी बेगम

शनिवार, 26 मार्च 2011

भूलने वाले से कोई कह दे ज़रा, इस तरह याद आने से क्या फायदा ...मुन्नी बेगम

गायिका: मुन्नी बेगम
भूलने वाले से कोई कह दे ज़रा, इस तरह याद आने से क्या फायदा
जब मेरे दिल की दुनिया बसाते नहीं, फिर ख्यालों में आने से क्या फायदा

चार तिनके जला के क्या मिल गया, मिट सका ना ज़माने से मेरा निशाँ
मुझ पे बिजली गिराओ तो जानें सही, आशियाँ पर गिराने से क्या फायदा

क्या कहूं आप से कितनी उम्मीद थी, आप क्या बदले दुनिया बदल सी गयी
आसरा देके दिल तोड़ते हैं मेरा, इस तरह सताने से क्या फायदा

तुमने मूसा को नाहक़ तकलीफ दी, लुत्फ़ आता अगर याद करते हमें
जिनके आँखों में ताब-ए-नज़ारा नहो, उनको जलवा दिखाने से क्या फायदा

पहले दिल को बुराई से कर पाक तू, फिर ख़ुलूस-ए-अक़ीदत से कर जुस्तजू
ऐसे सजदों से अल्लाह मिलता नहीं, हर जगह सर झुकाने क्या फायदा

लाख समझाया तुमको मगर ऐ शमी, तेरी होशयारी आखिर ना काम आ सकी
आँख मिलती गयी राज़ खुलते गए, अब हकीकत छुपाने से क्या फायदा
भूलने वाले से कोई कह दे ज़रा, इस तरह याद आने से क्या फायदा

अब शिद्दते ग़म में मसनूई, आराम सहारा देता है...मुन्नी बेगम

गायिका: मुन्नी बेगम
अब शिद्दते ग़म में मसनूई, आराम सहारा देता है
या दोस्त तसल्ली देते हैं, या जाम सहारा देता है
अब शिद्दते ग़म में मसनूई...

ऐ दोस्त मुहब्बत के सदमे, तनहा ही उठाने पड़ते हैं
रहबर तो फ़क़त इस रस्ते में, दो गाम सहारा देता है
अब शिद्दते ग़म में मसनूई...

दो नाम हैं सिर्फ इस दुनिया में, इक साक़ी का, इक यज़दां का
इक नाम परीशां करता है, इक नाम सहारा देता है
अब शिद्दते ग़म में मसनूई...

तूफ़ान के तेवर तो देखो, साहिल की कोई उम्मीद नहीं
मल्लाह की सूरत तो देखो, नाकाम सहारा देता है

अब शिद्दते ग़म में मसनूई, आराम सहारा देता है
या दोस्त तसल्ली देते हैं, या जाम सहारा देता है

एक बार मुस्कुरा दो... मुन्नी बेगम

एक बार मुस्कुरा दो
फिरदौस झूम उठे, फ़ज़ा मुकुर उठे
तुम मुस्कुरा उठो तो, खुदा मुस्कुरा उठे
इक बार मुस्कुरा दो ...एक बार मुस्कुरा दो

गायिका: मुन्नी बेगम

शनिवार, 8 जनवरी 2011

तुम भी चलकर काँधा दे दो...मुन्नी बेगम

तुम भी चलकर काँधा दे दो अब ये ख़ुशी की बात नहीं
जाती है बीमार की मय्यत शादी की बारात नहीं
गायिका: मुन्नी बेगम

गुरुवार, 19 नवंबर 2009

मंगलवार, 17 नवंबर 2009

शब को मेरा जनाज़ा जायेगा यूँ निकलकर…मुन्नी बेगम

शब को मेरा जनाज़ा जायेगा यूँ निकलकर
रह जायेंगे सहर तक दुश्मन भी हाथ मलकर
गायिका: मुन्नी बेगम

रविवार, 15 नवंबर 2009