रविवार, 7 दिसंबर 2008

शनिवार, 6 दिसंबर 2008

मंगलवार, 25 नवंबर 2008

होय मेरा दिल दे गया… (नुसरत फ़तेह अली खां की आवाज़)

नुसरत
होय मेरा दिल ले गया कोई छैल छबीला बांका सा
लड़ गये नैन लुट गया चैन जुलमी ने ऐसे लूटा……

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

बड़े भाई साहब्…(कथा सम्राट प्रेमचन्द की मशहूर कहानी)

प्रेमचन्द
हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण अपने समय की शिक्षा व्यवस्था को उघाड़ती हुई कहानी "बड़े भाई साहब" का प्रेम चन्द की महत्वपूर्ण कहानियों मे नाम लिया जाता है।

लेखक: प्रेमचन्द
स्वर: मेराज अहमद

गीत ने नेह सजाया रूप मेरा…( कुमार आदित्य की अवाज़)

कुमार
गीत ने नेह सजाया रूप मेरा मैं तुम्हें अनुराग से उर में सजाऊं
रंग कोमल भावना का भरा है लहरती देखकर धाती धरा……

गीतकार : महेन्द्रभटनागर
गायक : कुमार आदित्य विक्रम

मंगलवार, 18 नवंबर 2008

आज तुम्हारी आयी याद मन में गूंजा अनहद नाद… ( कुमार आदित्य की अवाज़)

कुमार

आज तुम्हारी आयी याद,
मन में गूँजा अनहद नाद !
बरसों बाद
बरसों बाद !

*

साथ तुम्हारा केवल सच था,
हाथ तुम्हारा सहज कवच था,
सब-कुछ पीछे छूट गया,
पर जीवित पल-पल का उन्माद !
आज तुम्हारी आयी याद !

*

बीत गये युग होते-होते,
रातों-रातों सपने बोते,
लेकिन उन मधु चल-चित्रों से
जीवन रहा सदा आबाद !
आज तुम्हारी आयी याद !

**************************

गीतकार : महेन्द्रभटनागर

गायक : कुमार आदित्य विक्रम

(कुमर आदित्य ग्वालियर एम0 पी0 के उभरते कलाकार हैं। वर्तमान में मुम्बई में रहकर फ़िल्म सगीत की यात्रा के लिये तैयारी कर रहें हैं)

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

कैसे मैं कहूं कि मुझे ईश्क हुआ…(कैलाश खेर की आवाज़)

कैलाश
यहां वहां जहां तहां उड़ती फिरूं, कैसे मैं कहूं कि मुझे ईश्क हुआ है…………………………
धड़के यह ज़ोर ज़ोर भड़के यह चारो ओर वह क्या जाने चित चोर वह हैंचंदा मैं चकोर

गायक:कैलाश खेर

शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2008

तेरी दीवानी…(कैलाश खेर की आवाज़)

कैलाश
प्रीत की लत मोंहे ऐसी लागी हो गयी मैं मतवारी
बल बल जाऊं अपने पिया को हे मैं जाऊं वारी

गायक:कैलाश खेर

बुधवार, 15 अक्तूबर 2008

जोगण बण बण कर घूमूं बैरागण बण बण घूमूं…(कैलाश खेर की अवाज़)

कैलाश
जोगण बण बण कर घूमूं बैरागण बण बण घूमूं
हां मैं तेरी चौखट चूमूं मैं तेरी और तू मेरा…अलबेला साजन मेरा

गायक:कैलाश खेर

शनिवार, 11 अक्तूबर 2008

चिटठी न कोई संदेश…(जगजीत सिंह की आवाज़)

जगजीत
चिटठी न कोई संदेश जाने वह कौन सा देस
जहां तुम चले गये…………………………………

गायक:जगजीत सिंह

शुक्रवार, 10 अक्तूबर 2008

गुरुवार, 9 अक्तूबर 2008

समझ सके न लोग सयाने…(नुसरत फ़तेह अली खान की आवाज़)

नुसरत
समझ सके न लोग सयाने इश्क़ का रुतबा इश्क़ ही जाने
इस दुनियां का खेल रचाया श्क़ की खातिर आप खुदा ने

गायक:नुसरत फ़तेह अली खान

रविवार, 28 सितंबर 2008

रमज़ान के मुबारक महीने व ईद के आगमन पर यह नात पेश है (ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में)

आप सभी को मैं यह बताना चाहूंगा कि उर्दू भाषा में नात उस कलाम को कहते हैं जो पैग़म्बर मुहम्मद (स0) की तारीफ़ में लिखा गया हो। ईद के आगमन पर ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह नात पोस्ट कर रहा हुं साथ ही आप सभी लोगों को ईद की मुबारकबाद्।
नात

आवाज़: ओवैस रज़ा क़ादरी

शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

गुरुवार, 25 सितंबर 2008

तू कहीं भी रहे सर पर तेरे इलज़ाम तो है…(ग़ुलाम अली की आवाज़)

ग़ुलाम
तू कहीं भी रहे सर पर तेरे इलज़ाम तो है
तेरे हाथों की लकीरों पर मेरा नाम तो है

गायक:ग़ुलाम अली

बुधवार, 24 सितंबर 2008

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

तुझसे मिलने की सज़ा देंगे…(जगजीत सिंह की अवाज़)

जगजीत
तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग
ये वफ़ावों का सिला है,देंगे तेरे शहर के लोग…॥
गायक:जगजीत सिंह

शुक्रवार, 19 सितंबर 2008

सारी रात तेरी याद सतावे…(नुसरत फ़तेह अली खान की अवाज़ में)

नुसरत
सारी-सारी रात तेरी याद सतावे केंदु मेरे नैन कोई प्यार न पावे
दिल देके पछतानियां मैं बेदर्दी नींद न आवे…………………
गायक:नुसरत फ़तेह अली खान

गुरुवार, 4 सितंबर 2008

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले (जगजीत सिंह की अवाज़)

जगजीत
दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैनें देखे हैं कैइ रंग बदलने वाले……………

गायक:जगजीत सिंह

सोमवार, 1 सितंबर 2008

निकलो न बेनक़ाब ज़माना खराब है…(पंकज उदास की आवाज़)

पंकज
बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियां
अकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गया
पूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआ
कहने लगीं के अक़्ल पे मर्दों की पड़ गया…

निकलो न बेनक़ाब ज़माना खराब है
और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है

सब कुछ हमें खबर है नसीहत न कीजिये
क्या होंगे हम खराब, ज़माना खराब है

मतलब छुपा हुआ है यहां हर सवाल में
तू सोचकर जवाब, ज़माना खराब है

राशिद तुम आ गये हो ना आखिर फ़रेब में
कहते न थे जनाब, ज़माना खराब है

कवि: मुमताज़ राशिद
गायक: पंकज उदास

शुक्रवार, 29 अगस्त 2008

मैं तेरे संग कैसे चलूं सजना…(नूरजहां की आवाज़)

नूरजहां
मैं तेरे संग कैसे चलूं सजना,
समंदर है मैं साहिलों की तरह

गायिका: नूरजहां

दीपक राग चाहत अपनी…(शाहेदा परवेज़ की आवाज़ में)

शाहेदा
दीपक राग चाहत अपनी, काहे सुनायें तुम्हें
हम तो सुलगते ही रहते हैं, कियों सुलगायें तुम्हें

गायिक:शाहेदा परवेज़

बुधवार, 27 अगस्त 2008

सोमवार, 25 अगस्त 2008

ऐ मेरे हमनशीं चल कहीं और चल…(मुन्नी बेग़म की आवाज़)

मुन्नी
ऐ मेरे हमनशीं चल कहीं और चल, इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम, अब तो कांटों पे भी हक़ हमारा नहीं

गायिका: मुन्नी बेग़म

कभी हम भी खूबसूरत थे…(नैयरा नूर की आवाज़)

नैयरा
कभी हम भी खूबसूरत थे किताबों में बसी खुशबू की मानिंद
सांस साकिन साकिन थी बहुत अनकहे लफ़्ज़ों से तस्वीरें बनाते थे

गायिका: नैयरा नूर

रविवार, 24 अगस्त 2008

कहानी-वापसी……(डा0 मेराज अहमद की आवाज़ में)

वापसी
आशा और विश्वाश की कहानी, "वापसी" एक ऐसे आदमी की ज़िन्दगी की दासतान है जो चालीस साल बाद अपनी ज़मीन पर लौटकर आता है। उसके ज़िन्दगी के प्रति सकारात्मक रवैये के कारण उसकी जड़ें ज़मीन पकड़ लेती हैं। वह अपनी बाक़ी ज़िन्दगी को क्या खूब जीता है और भरपूर जीता है।

लेखक: डा0 मेराज अहमद
स्वर: डा0 मेराज अहमद

शनिवार, 23 अगस्त 2008

शुक्रवार, 22 अगस्त 2008

हंगामा है क्यूं बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है…(ग़ुलाम अली की आवाज़)

ग़ुलाम अली
हंगामा है क्यूं बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नही डाला, चोरी तो नहीं की है……
हंगामा है…………………………

गायक: ग़ुलाम अली

मैने पैरों में पायल तो बांधी नही…(फ़रीदा खानम की आवाज़)

फ़रीदा
मैने पैरों में पायल तो बांधी नही……
क्यों सदा आ रही है…छना…ना…छन…,छना…ना…छन

गायिका: फ़रीदा खानम

बुधवार, 20 अगस्त 2008

दिल के अफ़साने निगाहों की ज़ुबां तक पहुंचे…(नूर जहां की आवाज़)

नूर
दिल के अफ़साने निगाहों की ज़ुबां तक पहुंचे
बात चलने की भी है, अब देखें कहां तक पहुंचे

गायिका: नूर जहां

मस्त नज़रों से अल्ला बचाए…(नुसरत फ़तेह अली खां की आवाज़)

नुसरत
मैने मासूम बहारों में तुझे देखा है
मैने पुर-नूर सितारों में तुझे देखा है……
मस्त नज़रों से अल्ला बचाए……………

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

चले तो कट ही जायेगा सफ़र…(मुसर्रत नज़ीर की आवाज़)

मुसर्रत
चले तो कट ही जायेगा सफ़र, आहिस्ता आहिस्ता
हम उसके पास जाते हैं मगर, आहिस्ता आहिस्ता

गायिका: मुसर्रत नज़ीर

मंगलवार, 19 अगस्त 2008

थक गया हूं अब तो उम्मीद्…(हारिस मुजीब)

हारिस
गीत "उम्मीद" अलीगढ़ के कुछ जोशीले नौजवानों की शौकिया कोशिश है, इसे आवाज़ दी है "हारिस मुजीब" ने, और बोल "काशिफ़" और "शफ़ीक़" के हैं। यह सभी नौजवान अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्दयालय अलीगढ़ सम्बद्ध ज़ाकिर हुसेन कालेज आफ़ इन्जीनियरिंग एन्ड टेक्नालोजी के इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग विभाग के छात्र हैं। हौसला अफ़्ज़ायी के लिये प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। (मेराज अहमद)

दोस्ती जब किसी से की जाये…(जगजीत सिंह)

जगजीत
दोस्ती जब किसी से की जाये
दुश्मनों की भी राये ली जाये

इस गज़ल के बोल के लिये यहां क्लिक करें।
गायक: जगजीत सिंह
शायर: राहत इंदौरी

गुरुवार, 14 अगस्त 2008

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी…(जगजीत सिंह की आवाज़ में)

जगजीत
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी
लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे………

गायक: जगजीत सिंह

पल दो पल हैं प्यार के……(नुसरत फ़तेह अली खां की आवाज़ में)

नुसरत
जैसे जीवन प्यार सजावे, जैसे फूल से खुशबू आवे
होती है प्रीत दिल हार के, दुनियां है सूनी बिन यार के
पल दो पल हैं प्यार के………

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

बुधवार, 13 अगस्त 2008

सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हमारा,…(लता जी की आवाज़ में सुनें)

लता
सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हमारा,…
हम बुलबुलें हैं उसकी, ये गुलसितां हमारा……

गायक: लता मंगेश्कर
शायर: सर अल्लामा इक़बाल

चिटठी आयी है, आयी है, वतन से चिटठी आयी है…(पंकज उदास की आवाज़ में)

आज़दी के शुभ अवसर पर पेश है यह गीत…

चिटठी आयी है, आयी है, वतन से चिटठी आयी है
बड़े दिनों के बाद, हम बे वतनों की याद, वतन से मिटटी आयी है……
पंकज
गायक: पंकज उदास

गुरुवार, 7 अगस्त 2008

सावन की भीगी रातों में…

नुसरत
सावन की भीगी रातों में जब फूल खिले बरसातों में
जब छेड़ें सखियां बातों में, तेरी यादां…………

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

जाने जां तू है कहां

नुसरत
जाने जां तू है कहां, सांसों में तू, आंखों में तू, गीतों में तू, धड़कन में तू।
तू सपना है या कोई साया, तुझे मैनें दिल में बसाया॥ तेरी याद, तेरी याद…………।

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

बुधवार, 6 अगस्त 2008

अपने हाथों कि लकीरों में बसा ल्रे मुझको…

जगजीत
अपने हाथों कि लकीरों में बसा ल्रे मुझको।
मैं हूं तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझको॥

गायक: जगजीत सिंह

कभी मैखाने तक जाते हैं हम और कम भी पीते हैं

पंकज
कभी मैखाने तक जाते हैं हम, और कम भी पीते हैं।
घटा ज़ुल्फ़ों की छा ज़ाए तो, बे मौसम भी पीते हैं।॥

गायक: पंकज उदास

हमें तो अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है…

ग़ुलाम
हमें तो अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है।
तुम्हें भी क्या कभी कोई दिवाना याद आता है॥

गायक: गुलाम अली

मंगलवार, 5 अगस्त 2008

चलो पी लें कि यार आये न आये…(पंकज उदास)

पंकज
खोते न हम जो होश उन्हें घर बुला के पी,
या फिर बुतों को सामने अपने बिठा के पी…
चलो पी लें कि यार आये न आये

गायक: पंकज उदास

चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल

पंकज
चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल
एक तू ही धनवान है गोरी, बाक़ी सब कंगाल

गायक: पंकज उदास

आहिस्ता कीजिये बातें, धड़कनें कोई सुन रहा होगा

पंकज
आहिस्ता कीजिये बातें, धड़कनें कोई सुन रहा होगा
लफ़्ज़ गिरने न पाएं होठों से, वक़्त के हाथ इन को चुन लेंगे


गायक: पंकज उदास

सोमवार, 4 अगस्त 2008

पिया रे पिया रे… (नुसरत फ़तेह अली खां )

नुसरत
पिया रे पिया रे ,पिया रे पिया रे
हो हो तारे बिना लागे नाहीं म्हारा जिया रे

गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

मोहे आयी न जग से लाज, घुंघरू टूट गए

पंकज उदास
मोहे आयी न जग से लाज, मैं इतना ज़ोर से नाची आज
कि घुंघरू टूट गए……

गायक: पंकज उदास

शनिवार, 2 अगस्त 2008

अन्तराल-कहानी

अन्तराल
कहानी: अन्तराल
लेखक: मेराज अहमद
स्वर: मेराज अहमद
यह कहानी पीढ़ी अन्तराल से उपजी द्वन्द्व भरी मानसिकता का उद्घाटन करती है, लेकिन इसका खास पहलू यह है कि इसमें जीवन के सकारात्मक आयामों की अभिव्यक्ति को तरजीह दी गई है।

अभी वो कमसिन उभर रहा है, अभी है उस पर शबाब आधा

जगजीत
अभी वो कमसिन उभर रहा है, अभी है उस पर शबाब आधा
अभी जिगर में खलिश है आधी, अभी है मुझ पर……

गायक: जगजीत सिंह

आज तक याद है वो प्यार का मंज़र मुझको

मेहदी हसन
आज तक याद है वो प्यार का मंज़र मुझको
जिसकी तस्वीर निगाहों में लिए फिरता हूं

गायक: मेहदी हसन

आंखों में तेरा जलवा रहेगा, होटों पे तेरा नग़मा रहेगा

पंकज
आंखों में तेरा जलवा रहेगा, होटों पे तेरा नग़मा रहेगा

गायक: पंकज उदास

दिल जला के मेरा, मुसकुराते हैं वो

गुलाम अली
दिल जला के मेरा, मुसकुराते हैं वो
अपनी आदत से कब बाज़ आते हैं वो

गायक: गुलाम अली

आह को चाहिये इक उम्र असर होने तक

जगजीत


आह को चाहिये इक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक


आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक


हम ने माना के तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जायेंगे हम तुमको ख़बर होने तक


ग़म-ए-हस्ती का 'असद' किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शम्म'अ हर रंग में जलती है सहर होने तक
*****************************
कवि: मिर्ज़ा गालिब
गायक: जगजीत सिंह

मंगलवार, 29 जुलाई 2008

अपनी धुन में रहता हूं, मैं बही तेरे जैसा हूं

ग़ुलाम अली
अपनी धुन में रहता हूं, मैं बही तेरे जैसा हूं
गायक: ग़ुलाम अली

ऐ रोशनी उनके शहर बता, उजियारों में अंधियारों का

मेहदी1:
ऐ रोशनी उनके शहर बता, उजियारों में अंधियारों का
गायक: मेहदी हसन

आज वही गीतों की रानी, आज वही है जाने ग़ज़ल

पंकज:1

आज वही गीतों की रानी, आज वही है जाने ग़ज़ल

ऐ जानेमन ऐ जानेजां, हो कभी मेहरबां

नुसरत1:
ऐ जानेमन ऐ जानेजां, हो कभी मेहरबां
गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

सोमवार, 28 जुलाई 2008

कल्बे हयात बन गया सांसों का तार भी…

इफ़्तिखार4:
कल्बे हयात बन गया सांसों का तार भी…

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

उसके चेहरे की चमक के सामने, आसमां………

इफ़्तिखार3:
उसके चेहरे की चमक के सामने, आसमां………

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

कभी उदास है, कभी खुश है आंसुओं की तरह

इफ़्तिखार2:

कभी उदास है, कभी खुश है आंसुओं की तरह

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

न जाने कब वो पलट आएं, घर खुला रखना



इफ़्तिखार 1:

न जाने कब वो पलट आएं, घर खुला रखना

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

रविवार, 27 जुलाई 2008

कभी किताबों में फूल रखना, कभी दरख्तों पे नाम लिखना

आवारगी
कभी किताबों में फूल रखना, कभी दरख्तों पे नाम लिखना
गायक: ग़ुलाम अली

चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला

आवारगी:
चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला ।
मेरी अवारगी ने मुझ्को आवारा बना डाला ॥
गायक:ग़ुलाम अली

हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही

आवारगी: हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही
गायक: ग़ुलाम अली

चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

चुपके: चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
गायक: ग़ुलाम अली
कवि:

शुक्रवार, 25 जुलाई 2008

चांद सिफ़ारिश जो करता हमारी…

सुर पसंदीदा गीत:फ़िल्म-फ़ना

तमन्ना फ़िर मचल जाए अगर तुम मिलने आजाओ

ग़ज़ल:ग़ज़ल " तमन्ना फ़िर मचल जाए अगर तुम मिलने आजाओ"
जगजीत सिंह

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह

ग़ज़ल: ग़ज़ल "हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह"
ग़ुलाम अली

गुरुवार, 24 जुलाई 2008

दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए

ग़ज़ल:ग़ज़ल "दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए"
फ़िल्म: उमराव जान

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें

ग़ज़ल: ग़ज़ल "ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें"
फ़िल्म: उमराव जान

अमरूद और हरी पत्तियां

अमरूद और हरी पत्तियां
कहानी: अमरूद और हरी पत्तियां
लेखक: मेराज अहमद
स्वर: मेराज अहमद
प्रस्तुत कहानी सम्बंधों के बीच उन लम्हों के पहचान की है, को जो ज़िंदगी की सहजता कई धुरी होते हैं।