मंगलवार, 29 जुलाई 2008

अपनी धुन में रहता हूं, मैं बही तेरे जैसा हूं

ग़ुलाम अली
अपनी धुन में रहता हूं, मैं बही तेरे जैसा हूं
गायक: ग़ुलाम अली

ऐ रोशनी उनके शहर बता, उजियारों में अंधियारों का

मेहदी1:
ऐ रोशनी उनके शहर बता, उजियारों में अंधियारों का
गायक: मेहदी हसन

आज वही गीतों की रानी, आज वही है जाने ग़ज़ल

पंकज:1

आज वही गीतों की रानी, आज वही है जाने ग़ज़ल

ऐ जानेमन ऐ जानेजां, हो कभी मेहरबां

नुसरत1:
ऐ जानेमन ऐ जानेजां, हो कभी मेहरबां
गायक: नुसरत फ़तेह अली खां

सोमवार, 28 जुलाई 2008

कल्बे हयात बन गया सांसों का तार भी…

इफ़्तिखार4:
कल्बे हयात बन गया सांसों का तार भी…

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

उसके चेहरे की चमक के सामने, आसमां………

इफ़्तिखार3:
उसके चेहरे की चमक के सामने, आसमां………

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

कभी उदास है, कभी खुश है आंसुओं की तरह

इफ़्तिखार2:

कभी उदास है, कभी खुश है आंसुओं की तरह

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

न जाने कब वो पलट आएं, घर खुला रखना



इफ़्तिखार 1:

न जाने कब वो पलट आएं, घर खुला रखना

कवि: इफ़्तिखार नसीम इफ़्ती

रविवार, 27 जुलाई 2008

कभी किताबों में फूल रखना, कभी दरख्तों पे नाम लिखना

आवारगी
कभी किताबों में फूल रखना, कभी दरख्तों पे नाम लिखना
गायक: ग़ुलाम अली

चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला

आवारगी:
चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला ।
मेरी अवारगी ने मुझ्को आवारा बना डाला ॥
गायक:ग़ुलाम अली

हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही

आवारगी: हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही
गायक: ग़ुलाम अली

चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है

चुपके: चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
गायक: ग़ुलाम अली
कवि:

शुक्रवार, 25 जुलाई 2008

चांद सिफ़ारिश जो करता हमारी…

सुर पसंदीदा गीत:फ़िल्म-फ़ना

तमन्ना फ़िर मचल जाए अगर तुम मिलने आजाओ

ग़ज़ल:ग़ज़ल " तमन्ना फ़िर मचल जाए अगर तुम मिलने आजाओ"
जगजीत सिंह

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह

ग़ज़ल: ग़ज़ल "हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह"
ग़ुलाम अली

गुरुवार, 24 जुलाई 2008

दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए

ग़ज़ल:ग़ज़ल "दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए"
फ़िल्म: उमराव जान

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें

ग़ज़ल: ग़ज़ल "ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें"
फ़िल्म: उमराव जान

अमरूद और हरी पत्तियां

अमरूद और हरी पत्तियां
कहानी: अमरूद और हरी पत्तियां
लेखक: मेराज अहमद
स्वर: मेराज अहमद
प्रस्तुत कहानी सम्बंधों के बीच उन लम्हों के पहचान की है, को जो ज़िंदगी की सहजता कई धुरी होते हैं।