शुक्रवार, 29 अगस्त 2008

दीपक राग चाहत अपनी…(शाहेदा परवेज़ की आवाज़ में)

शाहेदा
दीपक राग चाहत अपनी, काहे सुनायें तुम्हें
हम तो सुलगते ही रहते हैं, कियों सुलगायें तुम्हें

गायिक:शाहेदा परवेज़

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