सोमवार, 1 सितंबर 2008

निकलो न बेनक़ाब ज़माना खराब है…(पंकज उदास की आवाज़)

पंकज
बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियां
अकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गया
पूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआ
कहने लगीं के अक़्ल पे मर्दों की पड़ गया…

निकलो न बेनक़ाब ज़माना खराब है
और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है

सब कुछ हमें खबर है नसीहत न कीजिये
क्या होंगे हम खराब, ज़माना खराब है

मतलब छुपा हुआ है यहां हर सवाल में
तू सोचकर जवाब, ज़माना खराब है

राशिद तुम आ गये हो ना आखिर फ़रेब में
कहते न थे जनाब, ज़माना खराब है

कवि: मुमताज़ राशिद
गायक: पंकज उदास

2 टिप्‍पणियां:

  1. होगा ज़माना ख़राब
    लेकिन यह प्रस्तुति बहुत अच्छी है साहब.
    ==============================
    शुक्रिया
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

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