सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

बडी हसीन रात थी्…जगजीत सिंह की अवाज़


चराग़ अफ़ताब गुम बडी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम बडी हसीन रात थी

गयक: जगजीत सिंह

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है!